True Doctor – Moral Story In Hindi #2

True Doctor – Moral Story In Hindi

True Doctor - Moral Story In Hindi
True Doctor – Moral Story In Hindi

सुंदरवन के डॉक्टर टिंकू खरगोश (True Doctor) अपने दवाखाने में मरीज़ों से घिरे बैठे थे। अचानक एक ही हिरण लड़खड़ाते हुए वहां आया और उनके सामने गिर पड़ा। हिरण की टांग पर गहरे घाव थे। वह दर्द से छटपटा रहा था। डॉक्टर टिंकू दूसरे मरीजों को छोड़कर घायल हिरन के इलाज में लग गए।

कुछ देर बाद गप्पू की दर दवाखाने में आया और अकड़ कर बोला,”डॉक्टर टिंकू! सिंहराज को जुकाम हो गया है। तुम्हें जल्दी बुलाया है।”

टिंकू प्यार से बोले,”गप्पू! इस हिरण के प्राण संकट में है। मैं इससे ऐसी हालत में छोड़कर कहीं नहीं जा सकता। सिंह राज की बीमारी बहुत छोटी है। उन्हें यही भेज दो।”

गीदड़ बिगर कर बोला,” सिंहराज और इस मामूली गीदर की क्या बराबरी! इसके लिए तुम सिंहराज की बात नहीं मानोगे?”

“मेरे लिए सब बराबर है। जो अधिक बीमार है, उसे पहले देखूँगा।” डॉक्टर टिंकू ने साफ जवाब दिया।

गप्पू सिंह राज का सेवक था और इधर की बात उधर करने में उस्ताद। वह पैर पटकते हुए वहां से चला गया।

सिंह राज के पास गया और भड़कते हुए बोला,” महाराज! टिंकू खरगोश आपको कुछ नहीं समझता। उसने आपका अपमान किया है और यहां आने से इनकार भी कर दिया।”

सुनकर सिंहराज आग बबूला हो उठें और गरजकर बोले,”चलो! मैं अभी उसकी खबर लेता हूं।” गप्पू को साथ लेकर सिंहराज डॉक्टर टिंकू के दवाखाने में आ पहुंचे। उनके क्रोध को देखकर वहां सन्नाटा छा गया था। वहां पर बैठे सभी मरीज डर के मारे थरथर कांपने लगे।

सिंहराज ने डांटकर पूछा,”क्यों टिंकू! तुमने मेरे आदेश का पालन क्यों नहीं किया?” डॉक्टर टिंकू ने विनम्रता से कहा,” महाराज! पहले आप अपना हाल बता कर दवा ले लीजिए, फिर कारण भी बता दूंगा।” सिंहराज यह तय करके आए थे कि डॉक्टर टिंकू का आज काम तमाम कर देंगे। फिर उन्होंने सोचा,”पहले दवा ले लूं, फिर इससे नीपटूंगा।”

सबसे पहले डॉक्टर टिंकू ने सिंहराज की जांच की। उन्हें दवा पिलाई और बोलें, “महाराज! आप कुछ समय यहीं आराम करें। तब तक मैं इन मरीजों को देख लूं। उसके बाद आप मुझे जो चाहे सजा दे सकते हैं।”

डॉक्टर टिंकू की दवा इतनी अच्छी थी कि कुछ ही समय में सिंहराज को आराम मिल गया। उनका क्रोध भी जाता रहा। गप्पू मन ही मन बेचैन हो रहा था, “सिंहराज टिंकू को सजा देने में इतनी देरी क्यों कर रहे हैं!”

मरीजों से छुट्टी पाकर डॉक्टर टिंकू सिंहराज के पास आए। उनका हाल चाल पूछते हुए बोले, “वनराज! मैं डॉक्टर हूं। मेरे लिए राजा और प्रजा दोनों एक समान हैं। बिना किसी भेदभाव के मेरा उनका इलाज करना मेरा फ़र्ज़ है। आप देख रहे हैं कि इस हिरण की हालत बहुत ही खराब है। यदि इसको छोड़कर में आपको देखने आता, तो या जीवित नहीं बचता। एक डॉक्टर होने के नाते मैंने अपने कर्तव्य का पालन किया है। यदि ऐसा करना अपराध है, तो आप मुझे सजा जरूर दें।”

सिंह राज डॉक्टर टिंकू की बातों से बहुत खुश हूए और बोले,” डॉक्टर टिंकू! तुम बिल्कुल ठीक करें सेवा करने वालों को राजा और प्रजा में अंतर नहीं करना चाहिए।”

पासा पलटते देखकर गप्पू गीदर घबरा गया और चापलूसी करते हुए बोला,” सरकार! इसने वन के राजा यानी आप का अपमान किया है। आप इसे कठोर से कठोर दंड दीजिए। वरना हर कोई आपका अपमान करने लगेगा।”

“चुप हो जाओ!” सिंहराज गरजते हुए बोले, ” सजा डॉक्टर टिंकू को नहीं बल्कि तुम्हें मिलने चाहिए। तुम बातों को बढ़ा चढ़ाकर बोलते हो। तुम्हारी बातों में आकर मैं बेकसूर टिंकू को सजा दे‌ देता।”

“यह आप क्या कह रहे हैं महाराज!” गप्पू गिड़गिड़ाने लगा, “हुजूर! मैं तो आपका वफादार सेवक हूं।”

“तुम सेवक नहीं चापलूस हो।” सिंहराज गुस्से में बोले, ” तुमने डॉक्टर टिंकू पर झूठा आरोप लगाया तुम्हें इसकी सजा जरूर मिलेगी। आज से तुम इस दवाखाने में डॉक्टर टिंकू की मदद करोगे।”

वहां बैठे सभी मरीज सिंहराज की जय- जयकार करने लगे।

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सच्चा डॉक्टर

सिर झुकाए गप्पू ने डॉक्टर टिंकू से अपनी गलती के लिए माफी मांगी। डॉक्टर टिंकू को उसकी रोनी सूरत पर दया आ गई। वह गप्पू को गले लगाकर बोलें, ” दुखी होने की बात नहीं है गप्पू भाई। इस सजा के बहाने तुम्हें दीन दुखियों की सेवा करने का मौका मिलेगा और देखना कुछ ही दिनों बाद तुम्हें इस काम में मजा भी आएगा।”

अब गप्पू को भी समझ में आ गया कि चापलूसी करने तथा बातों को बढ़ा-चढ़ाकर बोलने का फल बहुत बुरा होता है। उसने तय किया कि अब वह कभी चापलूसी नहीं करेगा और किसी का भी बुरा नहीं चाहेगा।

Fact: हमें बड़े छोटे में अंतर नहीं करना चाहिए और अपने फर्ज का पालन करना चाहिए।

Moral Story In Hindi

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4 Comments

  1. Unique story

  2. Such h nyccc story

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