CHANAKYA NITI PART 1

आचार्य चाणक्य समझते हैं कि जिस व्यक्ति की स्त्री या पत्नी दुष्ट दुराचारिणी होती है.

जिसके सखा या मित्र नीच स्वभाव रखते हों और नौकर-नौकरानी बात-बात में तुरन्त उत्तर देते हों,

कहना बिल्कुल न मानते हों, और जिस गृह में सांप अपना वास कर ले। 

ऐसे गृह में वास करने वाला पुरुष निश्चित ही मृत्यु के बिल्कुल नजदीक रहता है। 

ऐसे मनुष्य की मृत्यु की समय सीमा निश्चित नहीं होती।

बुद्धि वाले व्यक्ति को सदैव चाहिए कि धनसंग्रह द्वारा अपने अपत्ति काल के समय की सुरक्षा करे

तथा धन से अधिक पत्नी धर्म की रक्षा करे। इन दोनों से भी अधिक स्वयं की सुरक्षा करे, 

क्योंकि अपना नाश हो जाने से धन और स्त्री दोनों से क्या लाभ? 

व्यक्ति को अपनी समस्त वस्तुओं की रक्षा करते करते जान गंवानी पड़े

तो सबसे पहले अपनी रक्षा करनी चाहिए।