भिक्षुक (The Beggar)

आज के इस निबंध में भिक्षुक (The Beggar) पर चर्चा करेंगे. इसमें भिक्षुक (The Beggar) से सम्बंधित बातों को साझा किया जायेगा. आशा करता हूँ कि आपको या निबंध पसंद आएगा.

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भिक्षुक (The Beggar) - essay - निबंध
भिक्षुक (The Beggar) – essay – निबंध

भिक्षुक निबंध हिंदी में

भारत प्रचुरता का देश है. लेकिन प्रचुरता के बीच यहाँ गरीबी है. अतः यहाँ हम भिक्षक सर्वत्र पाते हैं. हम उन्हें नगरों, ग्रामों, सड़कों और गलियों में देख सकते हैं. भिक्षुक वे हैं, जो भिक्षावृत्ति करते हैं. उनमें से अधिकांश गृहविहीन हैं. उनमें से कुछ पेशेवर भिक्षक हैं. वे दरवाजे-दरवाजे घूमते हैं. वे कुत्तों से भी बदतर जीवन जीते हैं. वे नालों या रास्तों के किनारे रहते हैं.

लोग उनसे घृणा करते हैं. उन्हें घृणा की दृष्टि से देखा जाता है. उन पर लोग हँसते हैं. उनको देखकर कुत्ते भी भौंकते हैं. कभी-कभी बच्चे उन्हें पीटते हैं और उन पर थूकते हैं. अधिकांश लोग उन्हें देखना भी पसन्द नहीं करते.

धार्मिक स्थानों में भिक्षुक बहुत बड़ी संख्या में देखे जाते हैं. उन्हें सभी जगह देखा जा सकता है. बनारस के घाटों और मन्दिरों में उनकी भीड़ इकट्ठी हो जाती है. वहाँ की गलियाँ भिक्षकों से भरी हैं. रेलवे स्टेशनों और बस पड़ावों पर वे पंक्तिबद्ध होकर बैठते हैं. वे रेलगाड़ियों में भीख माँगते हैं. घाटों पर बिना भिक्षा दिये लोग निकल नहीं सकते.

भिक्षुक अधिकांशतः रोगी, घायल और अपाहिज व्यक्ति हैं. उनमें से कुछ लँगड़े हैं. उनमें से कुछ कोढ़ी हैं. कुछ निक्कमे हैं. वे अधिकांशतः दुर्बल हैं. वे चिथड़ों में लिपटे हुए रहते हैं. वे गन्दे कपड़ों को पहनते हैं. अपने हाथों मे कटोरा लिये हुए रहते हैं. उनका चेहरा मुरझाया हुआ रहता है. वे सड़क के किनारे सोते हैं. वे होटलों का जूठन खाते हुए देखे जाते हैं.

वे भिक्षा माँगते हैं और आशीर्वाद देते हैं. कभी-कभी वे भजन भी गाते हैं. कुछ भिक्षुकों के पास गाने-बजाने के सामान भी रहते हैं. उनमे से कुछ अच्छे गायक भी होते हैं. वे स्वभावतः हमें अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं. वे हमें दुविधा में डालकर कुछ देने के लिए बाध्य कर देते हैं. उनके आँसू हमारे हृदय को पिघला देते हैं. वे हमें द्रवित कर देते हैं.

भिक्षुकों का जीवन अत्यन्त दुःखी जीवन होता है. वे विपत्तिपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं. वे भुखमरी के शिकार बने रहते हैं. उन्हें कहीं आश्रय नहीं मिलता. वे सूर्य की प्रखर किरणों को बर्दाश्त करते हैं. उनका समस्त जीवन उपेक्षित रहता है. वे बिना चिकित्सा के ही मर जाते हैं. वे भिक्षा माँगते हैं परन्तु लोग उन्हें फटकार देते हैं. लोग उनकी कोई चिन्ता नहीं करते. सरकार भी उन पर कोई ध्यान नहीं देती.

The Beggar Essay in English

India is the land of plenty. But there is poverty amidst plenty. So we can see beggars everywhere. They can be seen in towns, villages, on roads and on streets. Beggars are those who beg. Most of them are homeless. 

They live in slums and gutters. People hate them. They are looked down upon with contempt. They are laughed at. Dogs also bark at them. Sometimes children beat them. They spit on them. Most people dislike seeing them.

Beggars can be seen in large numbers at religious places. They can be seen everywhere. At Varanasi, they are seen crowding the ghats and temples. People cannot pass without paying them. Streets are full of beggars there. They sit in rows at railway stations and bus stands. They beg in trains.

Beggars are mostly sick, wounded and disabled persons. Some of them are blind. Some of them are lame. Some of them are lepers. Some are invalids. They are mostly weak. They are seen in fags. They put on dirty clothes. They have bowls in their hands. They have sad faces. They sleep on roadsides. They are seen licking the rubbish of hotels.

They beg and bless. They chant sometimes. Some of the beggars have musical instruments. Some of them are good singers. They naturally attract our sight. They force us to pause and pay. Their tears soften our hearts. They make us kind. They make us lament.

The beggars have a wretched life. They lead a cursed life. They face starvation. They have no shelter. They bear the heat of the hot sun. Nobody is there to nurse the beggars in illness. They live unseen. They die without medical help. They beg for alms. But people rebuke them. People don’t care for them. The government fails to help them.

Conclusion

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