भारतीय हजाम (नाई) – THE INDIAN BARBER

आज के इस निबंध में भारतीय हजाम या नाई (The Indian Barber) पर चर्चा करेंगे. इसमें भारतीय हजाम या नाई (The Indian Barber) से सम्बंधित बातों को साझा किया जायेगा. आशा करता हूँ कि आपको या निबंध पसंद आएगा.

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भारतीय हजाम (नाई) - THE INDIAN BARBER
भारतीय हजाम (नाई) – THE INDIAN BARBER

भारतीय हजाम (नाई) – हिंदी निबंध

भारतीय नाई हिन्दू है और उसका पेशा बाल बनाने का है. इसके अलावा वह विवाह तथा श्राद्ध में भी काम करता है. वह साधारण पोशाक पहनता है. वह धोती, कुर्ता और टोपी पहनता है. देहात का हजाम अभी तक अपने पूर्वजों के समान रहता है. 

परन्तु शहर में उसके रहन – सहन के ढंग में बहुत बड़ा परिवर्तन आ गया. वह सभी आवश्यक औजार रखता है. उसके चेहरे को देखकर कोई भी आदमी नहीं कह सकता है कि वह हजाम है. वह गाँव में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है. परन्तु शहर में वह एक ही स्थान पर बैठा रहता है. 

कुछ हजाम बश, साबुन, उस्तुरे और कैंचियाँ रखते हैं. आज हम नाई को एक अच्छा सैलून किये देखते हैं. वे अच्छे कपड़े पहनते हैं और साफ – सुथरा रहते हैं. कुछ नाई पढ़े – लिखे भी होते हैं. वह उसका बाल  बनाता है. उसे बुलाता है गाँव में वह उस आदमी के पास जाता है. 

उसके सामने एक गमछा फैला देता है और पीठ पर एक दूसरा कपड़ा रखता है. वह पहले दाढ़ी में साबुन लगाता है और तब दाढ़ी पर ब्रश रगड़ता है. इससे दाढ़ी मुलायम हो जाती है. इस तरह दाढ़ी बनाने में आसानी होती है. वह अपने छुरे को एक चमड़े पर तेज करता है और उससे बाल काटता है. वह मूँछ छाँटता है और दाढ़ी बनाता है. देहात के लोग उसे इसके लिए अनाज देते हैं पर शहर में बड़े लोगों से वह दस से बारह रुपये तक और बच्चों से पाँच से आठ रुपये तक लेता है. 

शहर में हमें सैलून देखने को मिलते हैं जहाँ दाढ़ी बनाई जाती है और बाल काटे जाते हैं. वहाँ एक साइन बोर्ड रहता है, कुछ टॅगे हुए ऐनक और बेंच रहते हैं. दरवाजे पर एक पर्दा भी टँगा रहता है. देहात में आजकल हजामों की कमी दीख पड़ती है ; क्योंकि ज्यादा हजाम जीविका हेतु और गाँव के अहंकारी अमीर के बुरे व्यवहारों से तंग आकर शहर में चले आये हैं. बाल काटने के पेशा के अतिरिक्त वह अन्य कार्य भी करता है. वह सामूहिक उत्सवों में हाथ बँटाता है. 

वह विवाह तथा पूजा – पाठ में और जन्म तथा मृत्यु के अवसर पर लोगों की मदद करता है. इन अवसरों पर वह बड़ा ही उपयोगी होता है. ऐसे मौकों पर वह महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है. हमें समाज के नियमों के अधीन उसकी सेवा लेनी ही पड़ती है. वह दूत का भी काम करता है. कभी – कभी वह गलत खबरें भी प्रचार करता है और लोगों को ठगने की कोशिश करता है. 

उससे हमें बड़ी – बड़ी सूचनाएँ मिल जाती हैं. एक नाई से हम बहुत – सी जानकारियाँ प्राप्त करते हैं. वह हमें किसी व्यक्ति के बारे में बता सकता है जिससे हम मिलना चाहते हैं या किसी स्थान का पता दे सकता है जहाँ हम जाना चाहते हैं. 

उसे शिक्षा मिलनी चाहिए. उसके बच्चे भी इससे लाभान्वित हों. उसे नशा लेने की आदत छोड़नी चाहिए. कभी – कभी पीये रहने के कारण वह ग्राहक के चेहरे पर उस्तुरे लगा देता है. ऐसे हजामों के प्रति लोगों में भय और घृणा की भावनाएँ आ जाती हैं. उसका रहन – सहन ठीक होना चाहिए और ऐसे कामों से उसे नफरत होनी चाहिए जो समाज के लिए अहितकर है.

The Indian Barber – Essay in English

The Indian barber belongs to a class whose work is hair-cutting. He also does other work during marriages and funerals. 

He puts on a simple dress. He keeps a dhoti, a kurta and a white cap. The village barber still lives like his ancestors. But in towns, there is a great change in their ways of living. He keeps all the shaving tools. From his appearance, one can know easily that he is a barber. 

He is seen generally moving from one place to another in villages, but in towns, he sits at one place. Some barbers keep brushes, soap, razors and a pair of scissors. We can now see barbers having modern saloons. They are well-dressed, neat and clean. Some are educated too. 

In the village, he reaches those men who require him. He wraps a dirty dhoti around the neck of the customer. He first applies soap and then brushes the chin. It becomes softened. Then it is easier to shave. He sharpens the razor on leather and trims the hair. He trims moustache and shaves beard. The village people pay him grains, but in towns, he charges ten to twelve rupees from a grown-up man and five to eight rupees from a boy. In towns, we see saloons where the barber shaves. 

He keeps a signboard, a few chairs, mirrors and benches. There is a curtain hanging inside his shop. In villages now one feels difficulty in getting a barber as he comes to towns to earn a living and to protect himself from the bad treatment of the rich and proud villagers. 

He does other work besides shaving. He takes part in marriages and worships births and deaths. He is very helpful in these functions. He has an important job to play during such occasions. We have to take his services as rules binding upon the society. He acts as a messenger and distributes letters and invitation cards. 

Sometimes he spreads false news and creates trouble. He is a great source of information. We can learn many things from a barber. He can tell us about a man we want to meet or a place we want to find out. 

He should receive education and give education to his children. When he shaves a man in a bad mood, he gives a deep cut. People get frightened and hate such a barber. He should live in a decent way and should not do the work which is disliked by society.

Conclusion

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