कीमतें ₹99 पर क्यों समाप्त होती हैं?

कीमतें ₹99 पर क्यों समाप्त होती हैं? (Why do Prices End at ₹99?)
कीमतें ₹99 पर क्यों समाप्त होती हैं? (Why do Prices End at ₹99?)

कीमतें ₹99 पर क्यों समाप्त होती हैं? (Why do Prices End at ₹99?)

कभी सोचकर देखा है दोस्तों शॉपिंग करते वक्त ये चीजों के दाम हमेशा 99 से क्यों खत्म होते हैं?

नई टी शर्ट खरीदनी है- ₹199, पिज़्ज़ा ऑर्डर करना है- ₹399,  फ़ोन रिचार्ज कराना है- ₹799.

ये लोग अपने प्राइस राउंड ऑफ क्यों नहीं कर देते हैं.

चलिए इसी टॉपिक पर आज हम बात करते हैं और जानते हैं कि कीमतें ₹99 पर क्यों समाप्त होती हैं? (Why do Prices End at ₹99?)

इंसानों की यह आदत होती है कि वे चीज़ो को लेफ्ट से राइट पढ़ते हैं. तो दुकान पर जब हम चीजों के दाम जल्दी जल्दी में देख रहे होते है तो हमलोग पहले डिजिट पर ज्यादा ध्यान देते हैं. तो प्राइस अगर ₹799 लिखा है तो हमें लगेगा कि ₹700  के आस पास है लेकिन एक्चुअल प्राइस ₹800 का होता है.

इस चीज़ को साइंटिफिकली भी प्रूफ किया जा चुका है. दो हज़ार बारह (2012) की एक स्टडी ने बताया था कि स्टॉक मार्केट में जिन स्टॉक्स का प्राइस राउंड नंबर पे होता है तो लोग उस स्टॉक्स को कम खरीदते हैं, लेकिन इनका प्राइस राउंड नंबर से एक सेंट कम होता है उन्हें लोग ज्यादा मात्रा में खरीदते हैं.

इसका एक और इंट्रेस्टिंग रीज़न दो हज़ार चौदह (2014) की IIM बैंगलोर की स्टडी में पता लगा था कि इंडियन कन्जयूमर्स चीजों को ज्यादा हाई वैल्यू मानते हैं, जब उनका प्राइस नाइन से खत्म होता है. इसके तुलना में जब किसी भी चीज़ का प्राइस ज़ीरो से खत्म हो.

इससे कस्टमर्स को लगता है कि इन्होने सबसे बेस्ट सामान ख़रीदा है जिसका क्वालिटी बेस्ट है.

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Conclusion

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