सबसे सुन्दर लड़की – Beautiful Short Moral Stories In Hindi New 21

सबसे सुन्दर लड़की – Short Moral Stories In Hindi
सबसे सुन्दर लड़की – Short Moral Stories In Hindi

दोस्तों आज की कहानी NCERT के कक्षा 7 के हिंदी कहानी की किताब से ली गयी है। इस कहानी को विष्णु प्रभाकर जी ने लिखा हैं। मैंने जब इस कहानी को पढ़ा तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा तो मैं सोचा कि इस कहानी को आपके सामने रखा जाए।

दोस्तों, मैं इस कहानी को थोरा विस्तार में लिखा है, उम्मीद करता हूँ कि ये कहानी आपको बहुत अच्छी लगेगी और अगर कुछ त्रुटी हो तो आप मुझे कमेंट बॉक्स में जरुर से जरुर बताएं।

तो आज के कहानी का शीर्षक है- सबसे सुन्दर लड़की – Short Moral Story In Hindi

सबसे सुन्दर लड़की – Short Moral Stories In Hindi

सबसे सुन्दर लड़की – Short Moral Stories In Hindi
सबसे सुन्दर लड़की – Short Moral Stories In Hindi

एक बड़े से समुद्र के किनारे एक गाँव बसा हुआ था। उस गाँव में एक कलाकार रहता था। वह कलाकार पूरा दिन उस समुद्र की लहरों से खेलता रहता था, वहाँ वह जाल भी डालता और सीपियाँ भी बटोरता रहता था। 

वहाँ रंग-बिरंगी कौड़ियाँ, नाना प्रकार के सुंदर-सुंदर शंख, कई प्रकार के पत्थर और ना जाने क्या-क्या वह समुद्र जाल में भर देता था। उस चुने हुए सामानों से वह तरह-तरह के खिलौने बनता था, तरह-तरह की मालायें बनाया करता था और उस बनाये हुए सामान को वह वहीं पास के एक बड़े नगर में बेच आता था।

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उसका एक बेटा भी था, जिसका नाम हर्ष था। उसकी उम्र अभी ग्यारह की भी नहीं हुई थी, लेकिन वह समुद्र की लहरों में ऐसे घुस जाता था, जैसे मानो तालाब में बत्तख घुस जाता है।

एक बार ऐसा हुआ कि उस कलाकार के एक रिश्तेदार का एक मित्र कुछ दिन के लिए वहाँ छुट्टी मनाने आया हुआ था। उसके साथ उसकी बेटी भी थी जिसका नाम मंजरी था। वह भी उम्र होगी कोई नौ-दस साल, लेकिन वह दिखने में बहुत ही सुंदर थी, वह बिलकुल गुड़िया जैसी दिखने में लग रही थी।

हर्ष बड़े गर्व के साथ मंजरी का हाथ पकड़कर उसे समुद्र के लहरों के पास ले जाता था। एक दिन मंजरी ने चिल्लाकर हर्ष से कहा, “क्या तुम्हें इसमें डर नहीं लगता है?”

तो हर्ष ने उसका जवाब दिया, “इसमें डर क्यों लगेगा मुझे, ये समुद्र की लहरें तो हमारे साथ खेलने ही तो आती हैं।”

तभी एक और बहुत बड़ी लहर हर्ष की ओर तेजी से दौड़ती हुई आई, मानो जैसे कि उसे वह लहर निगल ही जाएगी। इससे मंजरी बहुत जोर से चीख उठी, लेकिन हर्ष तो उछलकर उस लहर के ऊपर सवार हो गया और मजे से वह किनारे पर आ गया।

मंजरी ऐसा करने से बहुत डरती थी, परन्तु मंजरी मन ही मन वह यह भी चाहती थी कि वह भी समुद्र की तेज लहरों ऊपर सवार होकर बहुत दूर तक घूमे। 

मंजरी को यह सब करने का तब और भी मन करता था, जब वह वहाँ की दूसरी लड़कियों को वह समुद्र के लहरों में गोटा लगाते हुए देखा करती थी, विशेषकर कनक को, जो हर्ष के हाथों में हाथ डालकर समुद्र के उस तूफ़ानी लहरों पर स्वर होकर कहीं दूर निकल जाती।

वह बेचारी बडी गरीब थी। उसके पिता एक दिन नाव लेकर गए, तो वह कभी उसके पास लौटे ही नहीं। उसकी माँ मछलियाँ पकड़कर किसी तरह से अपने दो बच्चों को पालती थी। 

कनक छोटे-छोटे शंखों की कई प्रकार के मालायें बना-बनाकर बेचा करती थी। मंजरी को वह लड़की कनक ज़रा सी भी नहीं भाती थी क्योंकि हर्ष के साथ उसकी दोस्ती तो माजरी को कतई पसंद नहीं थी।

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एक दिन हर्ष ने देखा कि उसके पिता कई दिनों से एक बहुत ही सुंदर-सा खिलौना बनाने में लगे हुए हैं। वह एक पक्षी बना रहे थें, जो कई प्रकार के रंग-बिरंगी सीपियों से बना हुआ था। वह उस खिलौने को बहुत देर तक देखता रह, फिर उसने अपने पिता से पूछा, “बाबा, यह खिलौना आपने किसके लिए बनाया है?”

उसके पिता जो कलाकार थे, उन्होंने उत्तर दिया, “यह मैं एक सबसे सुंदर लड़की के लिए बना रह हूँ। मंजरी सुंदर है न? अब से दो दिन बाद उसका जन्मदिन भी है। उस दिन तुम इस पक्षी को मंजरी को भेंट में दे देना।”

हर्ष खुशी से उछल पड़ा और अपने पिता से बोला – “हाँ-हाँ बाबा, मैं यह सुंदर पक्षी मंजरी को ही दूंगा। उसे यह देखकर बहुत अच्छा लगेगा।” 

और यह बोलने के बाद वह जल्दी से दौड़कर मंजरी के पास पहुँच गया, फिर मंजरी को वह समुद्र के किनारे ले गया और उससे बातें करने लगा। फिर हर्ष, मंजरी से बोला,” क्या दो दिन बाद तुम्हारा जन्मदिन है?”

“हाँ, लेकिन तुमको कैसे पता चला?” 

“मुझे मेरे बाबा ने बताया कि दो दिन बाद तुम्हारा जन्मदिन है। हाँ, तो उस दिन तुम क्या-क्या करोगी?”

“मैं सबसे पहले सबेरे-सबेरे उठकर नहा-धोकर सबके चरण छूकर प्रणाम करूँगी। घर पर तो मैं सहेलियों को दावत पर बुलाती हूँ। वे सबलोग यहाँ नाचती-गाती भी हैं।”

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और वो दोनों इसी तरह से बातें करते-करते न जाने कब वहाँ से उठे गए और दोनों दूर तक समुद्र में कब चले गए। वहाँ सामने एक छोटी-सी चट्टान थी। हर्ष ने मंजरी से कहा, “आओ, उस छोटी से चट्टान तक चलें।”

मंजरी काफी निडर हो गयी थी। मंजरी ने भी बोला, “चलो।” तभी हर्ष ने देखा कि वहाँ कनक एक बड़ी सी चट्टान पर बैठी हुई है। तभी कनक ने जोर से चिल्लाकर हर्ष से कहा, “हर्ष, तुम दोनों भी यहाँ इस बड़े से चट्टान पर आ जाओ।”

तो हर्ष ने कनक को जोर से आवाज लगायी और बोला, “कनक, मेरे साथ मंजरी भी आयी हुई है वह वहाँ तक बड़े चट्टान के पास नहीं आ सकती है, तुम्हीं इधर आ जाओ।” अब मंजरी ने भी कनक को उस बड़े से चट्टान के ऊपर बैठा देखा। 

मंजरी ने जब कनक को देखा तो उसे बहुत ईर्ष्या हुई। वह वहाँ उस बड़े से चट्टान पर क्यों नहीं जा सकती है? क्या वो कनक से बहुत कमजोर है…

मंजरी यह सब अपने दिमाग में सोच ही रही थी कि तभी उसे समुद्र के किनारे एक बहुत ही सुंदर शंख दिखाई दिया। 

उसे देखकर मंजरी अनजाने ही उस शंख की ओर बढ़ी। तभी एक बड़ी सी समुद्र की लहर ने उसके पैर को जमीन से उखाड़ दिए और वहीं बड़ी सी चट्टान की ओर लुढ़क गई। इससे मंजरी के मुँह में समुद्र का खारा पानी भर गया। इससे उसे होश ही नहीं रहा। 

पता नहीं यह सब अचानक ही आनन-फानन में हो गया था। हर्ष ने जब उसको देखा तो चिल्लाता हुआ वह ओर बढ़ा लेकिन तभी उधर एक और लहर आई जिससे उसे मंजरी से दूर कर दिया था। 

अब यह निश्चित हो गया था कि मंजरी अब उस बड़ी चट्टान से टकरा ही जाएगी, लेकिन होना तो कुछ और ही था। उसी वक़्त जब कनक ने देखा तो उस क्रुद्ध लहर और मंजरी के बीच कूद पड़ी और मंजरी को अपने हाथों से जोड़ से पकड़ लिया।

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इसके दूसरे ही क्षण वे तीनों वही पर छोटी चट्टान पर मौजूद थे। कुछ देर तक हर्ष और कनक ने साथ मिलकर मंजरी को चट्टान पर लिटा दिया और उसकी छाती को जोर जोर से माला, तबी उसके पेट से सारा पानी बाहर निकल गया। 

जब मंजरी की आँखें खुली तो उसने देखा कि उसके शरीर पर ज़रा सी भी चोट मौजूद नहीं थी लेकिन मंजरी बार-बार कनक को ही देख रही थी।

मंजरी अब अपने जन्मदिन के अवसर पर पूरी तरह से ठीक थी। उसने अपने सभी दोस्तों को जन्मदिन के दावत पर बुलाया। उस पार्टी में सभी उसके लिए कुछ न कुछ रंग-बिरंगे उपहार लेकर आए थे। सबसे अंत में उस कलाकार की बारी आई। 

उस कलाकार ने कहा, “मैंने इस गाँव के सबसे सुंदर लड़की के लिए सबसे सुंदर खिलौना बनाकर लाया है। और आप सब यह जानते हैं कि वह लड़की कौन है? वह है मंजरी।”

वहाँ मौजूद सभी लोगों ने खुशी से जोर-जोर से तालियाँ बजाईं। बड़े प्यार से वह सुंदर खिलौना हर्ष ने मंजरी के हाथों में थमा दिया। मंजरी बार-बार उस खिलौने को देखती ही जा रही थी और खुश होती जा रही थी।

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तभी पता नहीं क्या हुआ, मंजरी अपनी जगह से उठ खरी हुई। उसके हाथ में वही सुंदर पक्षी का खिलौना था। वह धीरे-धीरे कनक के पास गयी। मंजरी ने बड़े स्नेह भरे स्वर में कनक से कहा, “यह पक्षी का सुंदर सा खिलौना तुम्हारा है। यहाँ और इस गाँव में एक तुम्ही सबसे सुंदर लड़की हो।” 

और एक क्षण तक वहन मौजूद सबलोग अचरज से दोनों को देखते रहे गये। फिर जब सबको यह बात समझ में आयी, तो सबने ने मंजरी की खूब प्रशंसा की। कनक बस मंजरी की ओर देखे जा रही था… और दूर समुद्र में लहरें उन्हें जोर- जोर से चिल्ला-चिल्लाकर बधाइयाँ दे रही थीं।

Credit For : सबसे सुन्दर लड़की – Short Moral Story In Hindi

For Story : NCERT 

For Image: NCERT

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-धन्यवाद 

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2 Comments

  1. Kafi achchi kahani hai yah.

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