ग्राम-पंचायत (The Village-Panchayat)

ग्राम-पंचायत (The Village-Panchayat)
ग्राम-पंचायत (The Village-Panchayat) | Source: Wikimedia

ग्राम-पंचायत – निबंध हिंदी में 

हिन्दू राज्यकाल में ग्राम पंचायत के कार्य गाँवों में होते थे. पहले यहाँ बड़े बड़े नगर और बाजार नहीं थे. गाँववासी बड़े आनन्द से रहते थे.

मुस्लिम और ब्रिटिश शासक गाँवों में जाना पसन्द नहीं करते थे. उन्होंने नगर तथा बाजार बसाये, जहाँ पर सभी सरकारी कार्य किये जाते थे. इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ा. गाँवों की रौनक खत्म हो गई. गाँव वीरान हो गये. महात्मा गाँधी ने यह देखा . उन्होंने शहर के लोगों को फिर से गाँव की ओर लौटाने का विचार किया. वे स्वयं गाँव में रहने लगे और इस तरह देशवासियों के सामने उन्होंने एक उदाहरण पेश किया.

भारत सरकार ने देश में ग्राम पंचायत के गठन की व्यवस्था लागू की है. इसका उद्देश्य गाँवों को आत्मनिर्भर बनाना है. सरकार के कार्य अब धीरे-धीरे गाँवों की ओर परिवर्तित होते जा रहे हैं. यह आशा की जाती है कि कुछ दिनों के बाद नगर और बाजार घटकर अपने साधारण रूप में आ जाएँगे और गाँव अपने पुराने वैभव को प्राप्त कर लेंगे.

ग्राम पंचायत की दो शाखाएँ हैं—एक कार्यकारिणी और दूसरी न्याय सम्बन्धी . गाँव वाले एक मुखिया का चुनाव करते हैं, जो कार्यकारिणी का प्रमुख होता है. न्याय – सम्बन्धी समिति के लिए सरपंच चुना जाता है, जो ग्राम कचहरी का प्रमुख होता है. उसे मुकदमों का निर्णय करने का अधिकार है.

हर पंचायत में एक ग्राम सेवक रहता है, जिसे सरकार से वेतन मिलता है. वह ग्राम- कचहरी का लेखा-जोखा रखता है. इस विभाग का एक अफसर होता है, जो हर पंचायत की देख-रेख किया करता है. यह व्यवस्था बहुत अच्छे विचारों पर आधारित है, परन्तु यह पूर्ण सुचारु रूप से नहीं चल रहा है. लोग प्रायः मुखिया, सरपंच आदि पदाधिकारियों के चुनाव के प्रश्न पर आपस में लड़ जाते हैं. इस तरह गाँव बर्बादियों के केन्द्र बन गये हैं और आपसी दलबन्दियाँ तथा गुटबन्दियाँ चलती रहती हैं.

गाँव वालों के सामने इसके उचित संचालन की व्यवस्था की आवश्यकता है. साथ ही अपनी बड़ी समस्याओं को सुलझाना है. इस विषय में गाँववासियों को अपनी जवाबदेही के साथ कार्य करना चाहिए. सही और आधुनिक तरीकों द्वारा गाँवों का सर्वांगीण विकास हो सकता है.

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The Village-Panchayat – Essay in English

During the Hindu period, the work of the Government was in villages. There were no big cities or towns. The villagers were very happy.

The Mohammedan and the British rulers did not like to go to villages. They built towns and cities and put all the work of the Government there. It had a very bad effect. Villages lost their splendour. They became deserted. Mahatma Gandhi saw this. He himself began to live in a village and set an example to his countrymen.

The Indian Government has introduced the Village-Panchayat system. Its aim is to make villagers self-sufficient. The work of the Government is gradually being transferred to villages. It is hoped that in due course the towns and the cities will be reduced to their normal size and the villages will get back their past glory.

The Village-Panchayat has two units—one is the Executive and the other is the Judiciary. Fifteen members are elected for the two houses. The villagers elect a mukhiya who is the Executive Head.

The villagers also elect a sarpanch. He is the head of the Village Court. He has to decide cases.

There is a Gram-Sevak who gets paid by the Government. He keeps all the records of the court. There is also an officer who is in charge of the defence force.

The system is based on good principles. But it is not working properly. Often there are quarrels over the question of the election of Mukhias, Panchas and Sarpanches. Villages have become centres of evil. There are parties and sub-parties.

Villagers have a great many problems before them. There is a need for proper education. They should realise their duty and responsibility. They should see that their villages make all-around progress.

Conclusion

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