है बस कि हर इक उनके इशारे में निशां और - मिर्ज़ा ग़ालिब - हिंदी शायरी

है बस कि हर इक उनके इशारे में निशां और | मिर्ज़ा ग़ालिब | हिंदी शायरी

आपके सामने हिंदी शायरी (Hindi Poetry) “है बस कि हर इक उनके इशारे में निशां और” लेकर आया हूँ और इस कविता को मिर्ज़ा ग़ालिब (Mirza Ghalib) जी ने लिखा है.
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घर हमारा जो न रोते भी तो वीरां होता

घर हमारा जो न रोते भी तो वीरां होता | मिर्ज़ा ग़ालिब | हिंदी शायरी

आपके सामने हिंदी शायरी (Hindi Poetry) “घर हमारा जो न रोते भी तो वीरां होता” लेकर आया हूँ और इस कविता को मिर्ज़ा ग़ालिब (Mirza Ghalib) जी ने लिखा है.
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दोसत ग़मखवारी में मेरी सअयी फ़रमायेंगे क्या | मिर्ज़ा ग़ालिब | हिंदी शायरी

दोसत ग़मखवारी में मेरी सअयी फ़रमायेंगे क्या | मिर्ज़ा ग़ालिब | हिंदी शायरी

आपके सामने हिंदी शायरी (Hindi Poetry) “दोसत ग़मखवारी में मेरी सअयी फ़रमायेंगे क्या” लेकर आया हूँ और इस कविता को मिर्ज़ा ग़ालिब (Mirza Ghalib) जी ने लिखा है.
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दायम पड़ा हुआ तेरे दर पर नहीं हूं मैं | मिर्ज़ा ग़ालिब | हिंदी शायरी

दायम पड़ा हुआ तेरे दर पर नहीं हूं मैं | मिर्ज़ा ग़ालिब | हिंदी शायरी

आज मैं फिर से आपके सामने हिंदी शायरी (Hindi Poetry) “दायम पड़ा हुआ तेरे दर पर नहीं हूं मैं” लेकर आया हूँ और इस कविता को मिर्ज़ा ग़ालिब (Mirza Ghalib) जी ने लिखा है.
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