जी है जुगनू-सी ज़िंदगी हमने | हंसराज रहबर | हिन्दी कविता

नमस्कार दोस्तों! आज मैं फिर से आपके सामने हिंदी कविता (Hindi Poem) “जी है जुगनू-सी ज़िंदगी हमने” लेकर आया हूँ और इस कविता को हंसराज रहबर (Hansraj Rahbar) जी ने लिखा है.

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जी है जुगनू-सी ज़िंदगी हमने | हंसराज रहबर | हिन्दी कविता
जी है जुगनू-सी ज़िंदगी हमने | हंसराज रहबर | हिन्दी कविता

जी है जुगनू-सी ज़िंदगी हमने – हंसराज रहबर – हिन्दी कविता

जी है जुगनू-सी ज़िंदगी हमने
दी अँधेरों को रोशनी हमने.

लब सिले थे ख़मोश थी महफ़िल
अनकही बात तब कही हमने.

सच के बदले मिली जो बदनामी
वो भी झेली ख़ुशी-ख़ुशी हमने.

ज़ख़्म पर जो नमक छिड़कते थे
उनसे कर ली थी दोस्ती हमने.

जिसमें नफ़रत भरी जहालत थी
ख़ूब देखी है वह हँसी हमने.

शक्ल-सूरत से आदमी थे वो
जिनको समझा था आदमी हमने.

हर ज़बाँ पर है वाह वा ‘रहबर’
आँख देखी ग़ज़ल कही हमने.

Conclusion

तो उम्मीद करता हूँ कि आपको हमारा यह हिंदी कविता “जी है जुगनू-सी ज़िंदगी हमने” अच्छा लगा होगा जिसे हंसराज रहबर (Hansraj Rahbar) जी ने लिखा है. आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें आप Facebook Page, Linkedin, Instagram, और Twitter पर follow कर सकते हैं जहाँ से आपको नए पोस्ट के बारे में पता सबसे पहले चलेगा. हमारे साथ बने रहने के लिए आपका धन्यावाद. जय हिन्द.

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Pixabay: [1]

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