किस कदर गर्म है हवा देखो | हंसराज रहबर | हिन्दी कविता

नमस्कार दोस्तों! आज मैं फिर से आपके सामने हिंदी कविता (Hindi Poem) किस कदर गर्म है हवा देखो लेकर आया हूँ और इस कविता को हंसराज रहबर (Hansraj Rahbar) जी ने लिखा है.

आशा करता हूँ कि आपलोगों को यह कविता पसंद आएगी. अगर आपको और हिंदी कवितायेँ पढने का मन है तो आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं (यहाँ क्लिक करें).

किस कदर गर्म है हवा देखो | हंसराज रहबर | हिन्दी कविता
किस कदर गर्म है हवा देखो | हंसराज रहबर | हिन्दी कविता

किस कदर गर्म है हवा देखो | हंसराज रहबर | हिन्दी कविता

किस कदर गर्म है हवा देखो
जिस्म मौसम का तप रहा देखो

बदगुमानी-सी बदगुमानी है
पास होकर भी फ़ासला देखो

वे जो उजले लिबास वाले है
उनकी आँखों में अज़दहा देखो

हो अंधेरा सफ़र, सफ़र ठहरा
ले के चलते है हम दिया देखो

खेलता है जो मौत से होली
क्या करेगा वो मनचला देखो

अम्न ही अम्न सुन लिया, लेकिन
मक़तलों का भी सिलसिला देखो

इस ज़माने में भी जी लिया ‘रहबर’
मर्दे-मोमिन का हौसला देखो

Conclusion

तो उम्मीद करता हूँ कि आपको हमारा यह हिंदी कविता किस कदर गर्म है हवा देखो अच्छा लगा होगा जिसे हंसराज रहबर (Hansraj Rahbar) जी ने लिखा है. आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें आप Facebook Page, Linkedin, Instagram, और Twitter पर follow कर सकते हैं जहाँ से आपको नए पोस्ट के बारे में पता सबसे पहले चलेगा. हमारे साथ बने रहने के लिए आपका धन्यावाद. जय हिन्द.

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Pixabay: [1]

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