पत्ते झड़ते हर कोई देखे लेकिन चर्चा कौन करे | हंसराज रहबर | हिन्दी कविता

नमस्कार दोस्तों! आज मैं फिर से आपके सामने हिंदी कविता (Hindi Poem) पत्ते झड़ते हर कोई देखे लेकिन चर्चा कौन करे लेकर आया हूँ और इस कविता को हंसराज रहबर (Hansraj Rahbar) जी ने लिखा है.

आशा करता हूँ कि आपलोगों को यह कविता पसंद आएगी. अगर आपको और हिंदी कवितायेँ पढने का मन है तो आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं (यहाँ क्लिक करें).

पत्ते झड़ते हर कोई देखे लेकिन चर्चा कौन करे | हंसराज रहबर | हिन्दी कविता
पत्ते झड़ते हर कोई देखे लेकिन चर्चा कौन करे | हंसराज रहबर | हिन्दी कविता

पत्ते झड़ते हर कोई देखे लेकिन चर्चा कौन करे | हंसराज रहबर | हिन्दी कविता

पत्ते झड़ते हर कोई देखे लेकिन चर्चा कौन करे
रुत बदली तो कितनी बदली ये अंदाज़ा कौन करे

मन में जिसके खोट भरा है झूठ-कपट से नाता है
उनसे हमको न्याय मिलेगा ऐसी आशा कौन करे

सीधी अँगुली घी निकलेगा,आज तलक देखा न सुना
झूठे दावे करनेवालो, तुमसे झगड़ा कौन करे

बोल रहे इतिहास के पन्ने सीधी-सच्ची एक ही बात
धरती डाँवा-डोल हो जब कानून कि परवा कौन करे

ये चेहरे हैं इंसानों के कुछ तो अर्थ है ख़ामोशी का
सुनने वाले बहरे हैं बेकार का शिकवा कौन करे

अब हम भी हथियार उठाएँ भोलेपन में ख़ैर नहीं
राजमहल में डाकू बैठे उनसे रक्षा कौन करे

‘रहबर’ वह समय आ पहुँचा जब मरने वाले जीते हैं
ऐसे में क्या मौत से डरना, जीवन आशा कौन करे

Conclusion

तो उम्मीद करता हूँ कि आपको हमारा यह हिंदी कविता पत्ते झड़ते हर कोई देखे लेकिन चर्चा कौन करे अच्छा लगा होगा जिसे हंसराज रहबर (Hansraj Rahbar) जी ने लिखा है. आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें आप Facebook Page, Linkedin, Instagram, और Twitter पर follow कर सकते हैं जहाँ से आपको नए पोस्ट के बारे में पता सबसे पहले चलेगा. हमारे साथ बने रहने के लिए आपका धन्यावाद. जय हिन्द.

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Pixabay: [1]

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