फूल के प्रति – मुरझाया फूल – हिंदी कविता – सुभद्रा कुमारी चौहान

नमस्कार दोस्तों! आज मैं फिर से आपके सामने एक हिंदी कविता (Hindi Poem) “फूल के प्रति” और “मुरझाया फूल” लेकर आया हूँ और इन दोनों कविताओं को सुभद्रा कुमारी चौहान (Subhadra Kumari Chauhan) जी ने लिखा है. आशा करता हूँ कि आपलोगों को यह कविता पसंद आएगी. अगर आपको और हिंदी कवितायेँ पढने का मन है तो आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं (यहाँ क्लिक करें).

फूल के प्रति – हिंदी कविता – सुभद्रा कुमारी चौहान

फूल के प्रति - मुरझाया फूल - हिंदी कविता - सुभद्रा कुमारी चौहान

डाल पर के मुरझाए फूल!
हृदय में मत कर वृथा गुमान.
नहीं है सुमन कुंज में अभी
इसी से है तेरा सम्मान.

मधुप जो करते अनुनय विनय
बने तेरे चरणों के दास.
नई कलियों को खिलती देख
नहीं आवेंगे तेरे पास.

सहेगा कैसे वह अपमान?
उठेगी वृथा हृदय में शूल.
भुलावा है, मत करना गर्व
डाल पर के मुरझाए फूल.

मुरझाया फूल – हिंदी कविता – सुभद्रा कुमारी चौहान

फूल के प्रति - मुरझाया फूल - हिंदी कविता - सुभद्रा कुमारी चौहान

यह मुरझाया हुआ फूल है,
इसका हृदय दुखाना मत.
स्वयं बिखरने वाली इसकी
पंखड़ियाँ बिखराना मत.

गुजरो अगर पास से इसके
इसे चोट पहुँचाना मत.
जीवन की अंतिम घड़ियों में
देखो, इसे रुलाना मत.

अगर हो सके तो ठंड
बूँदें टपका देना प्यारे!
जल न जाए संतप्त-हृदय
शीतलता ला देना प्यारे!!

Conclusion

तो उम्मीद करता हूँ कि आपको हमारा यह हिंदी कविता “फूल के प्रति” और “मुरझाया फूल” अच्छा लगा होगा जिसे  सुभद्रा कुमारी चौहान (Subhadra Kumari Chauhan)  जी ने लिखा है. आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें आप Facebook PageLinkedinInstagram, और Twitter पर follow कर सकते हैं जहाँ से आपको नए पोस्ट के बारे में पता सबसे पहले चलेगा. हमारे साथ बने रहने के लिए आपका धन्यावाद. जय हिन्द.

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Pixabay: [1], [2]

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